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मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को होगा मतदान, 1.80 लाख सुरक्षाकर्मी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे...

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में 45,000 महिला कर्मचारियों की सेवायें ली जायेगी. इसके साथ ही मतदान के दिन 1.80 लाख सुरक्षाकर्मी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे. प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) वीएल कांता राव ने सोमवार को यहां पत्रकारों को बताया कि प्रदेश में कुल 3,00,782 कर्मचारी चुनाव कार्य में लगेंगे. इनमें 45,904 महिला कर्मचारी शामिल हैं. प्रदेश में 65,367 मतदान केन्द्रों पर चुनाव कराया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इसके साथ ही स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिये 1.80 लाख सुरक्षा कर्मी तैनात किये जाएंगे. इनमें केन्द्रीय और राज्य के सुरक्षाकर्मी शामिल हैं.

सीईओ ने बताया कि प्रदेश में 160 मतदान केन्द्र केवल दिव्यांग कर्मचारियों के जिम्मे रहेंगे. ये बूथ पूरी तरह दिव्यांग कर्मचारी ही संचालित करेंगे. इसके अलावा 3046 मतदान केन्द्र केवल महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित किये जाएंगे. उन्होंने कहा कि प्रदेश में 17,000 मतदान केन्द्र संवेदनशील घोषित किये गये हैं. यहां केन्द्रीय अर्ध सैनिक बल और वेबकास्टिंग के साथ माइक्रो पर्यवेक्षक भी तैनात रहेंगे.

चुनाव आयोग के मुताबिक 28 नवंबर को विधानसभा की 230 सीटों पर होने वाले मतदान के लिये कुल 2907 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. इनमें 1102 निर्दलीय उम्मीदवार हैं.

मध्यप्रदेश में मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद प्रदेश में कुल 5,04,95,251 मतदाता हैं. इनमें 2,63,01,300 पुरुष, 2,41,30,390 महिला एवं 1,389 थर्ड जेंडर के मतदाता हैं. इसके साथ ही इसमें 62,172 सेवारत मतदाता हैं जो कि डाक मतपत्र से मतदान कर सकते हैं.

वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में कांटे की टक्कर के संकेतों के बीच भाजपा और कांग्रेस अब एक दूसरे के मजबूत गढ़ माने जाने वाले इलाकों में मात देने के लिए किसी तरह की कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे है. सभी प्रमुख ‘पारंपरिक सीटों’ पर भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रचार के लिए घर-घर जा रहे है. इन नेताओं में कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे अनुभवी नेता और शिवराज सिंह चौहान तथा कैलाश विजयवर्गीय जैसे भाजपा के दिग्गज शामिल हैं.

कई नेताओं, पार्टी कार्यकर्ताओं और आम मतदाताओं ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि दिग्गज नेता भी अपनी तथाकथित ‘सुरक्षित सीटों’ पर अभूतपूर्व चुनाव प्रचार में शामिल हैं और वे प्रतिद्वंद्वियों के लिए कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते है.

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा,‘‘राज्य में एक व्यापक राजनीतिक लड़ाई देखने को मिल रही है. 15 वर्षों की सत्ता विरोधी लहर के बाद भाजपा के लिए जीत हासिल करना आसान नहीं है और सत्ता में वापसी करने के लिए कांग्रेस के लिए करो या मरो की स्थिति है.’’ 

गुना-शिवपुरी सीट से कांग्रेस सांसद सिंधिया ने अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए अधिकतम विधानसभा सीटें सुनिश्चित करने के लिए अपने संसदीय क्षेत्र और इसके आसपास 40 से अधिक रैलियां की.

कांग्रेस नेता के एक करीबी सहयोगी ने कहा,‘‘हमें इस संसदीय सीट में आठ विधानसभा सीटों में से कम से कम छह सीटें जीतने की उम्मीद हैं. इस चुनाव को सिंधिया के व्यक्तिगत चुनाव अभियान के रूप में लिया जा रहा है.’’ 

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