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मायावती ने धर्म के आधार पर मांगा वोट, कहा - 'मुसलमान महागबंधन को ही वोट दें'

Written By Amit Bajpayee | Mumbai | Published:

लोकसभा चुनाव 2019 में महागठबंधन जोश में होश खोते नजर आई।  बसपा, सपा और रालोद गठबंधन की लोकसभा चुनाव के लिए पहली संयुक्त रैली की शुरुआत रविवार को सहारनपुर के देवबंद से की। इस महारैली में बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायवती ने आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए धर्म के आधार पर वोट देने की अपील की। मायावती ने मुस्लिम समाज से अपील की मुस्लिम महागठबंध को ही वोट दें। भावना में बहकर वोट ना बांटे मुस्लिम । 


वहीं बीएसपी प्रमुख मायवती ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा 'अगर भीड़ की जानकारी पीएम मोदी को मिलेगी तो वे पगला जाएंगे और अगली बार शराब के साथ-साथ और न जाने क्या-क्या कहेंगे । इसका संज्ञान नहीं लेना है । उन्होंने कहा कि यह तय है कि अब यूपी से बीजेपी जा रही है और महागठबंधन आ रहा है, बशर्ते वोटिंग मशीनों से छेड़छाड़ न हो । बसपा सुप्रीमो ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। कहा कि कांग्रेस अपनी गलत नीतियों की वजह से हारी। यह हालत बीजेपी की होगी। इस बार सत्ता से बाहर होंगे। इस बार चौकीदारी का नाटक भी नहीं बचा पाएगा। चाहे कितनी भी ताकत न लगा लें।  


देवबन्द की यह रैली जामिया तिब्बिया मेडिकल कॉलेज के पास आयोजित की गई है। ' यह पहली बार हुआ कि गठबंधन की तीनों पार्टियों के प्रमुख नेता एक ही मंच पर मौजूद थे।  इस रैली में मायावती , अखिलेश यादव , अजित सिंह और जयंत चौधरी ने भाषण दिया. 


मायावती ने आगे कहा कि हमें मौका मिला तो किसनों का कोई बकाया नहीं रहेगा। दलितों , पिछड़ो और आदिवासियों का आरक्षण का कोटा अधूरा पड़ा है। पहले कांग्रेस और अब बीजेपी की सरकार में इन वर्गों को प्राइवेट नौकरी में आरक्षण देने के बजाय सारे काम धन्ना सेठों को दिए जा रहे हैं।  उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी से बेरोजगारी बढ़ी है।  देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा है।


बसपा प्रमुख ने कहा कि मेरी पार्टी घोषणापत्र से ज्यादा काम में विश्वास रखती है। ये सब जानते है। मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने गरीबों को लुभाने के लिए 6 हजार रुपये प्रतिमाह देने की बात कही है, इससे गरीबी दूर होने वाली नहीं है. अगर हमारी सरकार बनती है तो सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्रों में रोजगार देने की व्यवस्था की जाएगी।


बता दें चुनाव आयोग के अनुसार राजनीतिक दल धर्म के आधार पर वोट नहीं मांग सकते। आचार सहिंता तोड़ने पर आयोग कार्रवाई भी कर सकता है। जरूरी होने पर आयोग मुकदमा दर्ज भी करा सकता है।