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लोकसभा चुनाव के दौरान छाए रहे ये पांच बड़े विवाद, राजनीतिक पार्टियों के लिए भी बने सिरदर्द

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

लोकसभा की 543 में 542 सीटों पर चुनाव के लिये सात दौर की मतगणना के बाद बृहस्पतिवार को मतगणना की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। सभी लोकसभा सीटों के लिये बनाये गये मतगणना केन्द्रों सुबह आठ बजे से वोटों की गिनती शुरू हो जायेगी। 

सात चरण के मतदान के बाद 542 सीटों पर 8,000 से अधिक प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला 23 मई को मतगणना के बाद होगा। तमिलनाडु की वेल्लोर सीट पर गड़बड़ी की शिकायतों के बाद आयोग ने मतदान स्थगित कर दिया था। लेकिन इसी बीच लोकसभा चुनाव के दौरान वो पांच विवाद जिनकी चर्चा सबसे ज्यादा हुई।

पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा

पश्चिम बंगाल में 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान भारी हिंसा देखी गई, जिसमें सत्तारूढ़ तृणमूल पार्टी की अगुवाई में सीएम ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच झड़प हुई। सबसे महत्वपूर्ण घटना कोलकाता में भाजपा प्रमुख अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई, जिस दौरान भाजपा और तृणमूल समर्थकों के बीच भारी हिंसक झड़पें हुईं। झड़पों के बीच, कोलकाता कॉलेज में 19 वीं सदी के समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति को भी नुकसान पहुंचा। हालांकि विवाद के बाद, चुनाव आयोग ने राज्य में चुनाव प्रचार को 24 घंटे के लिए स्थगित कर दिया और राजनीतिक दलों को बंगाल के नौ निर्वाचन क्षेत्रों में प्रचार करने से प्रतिबंधित कर दिया।  वहीं भाजपा ने तृणमूल सरकार पर भाजपा प्रमुख अमित शाह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को हेलिकॉप्टर लैंडिंग की अनुमति देने से राज्य में चुनाव प्रचार में बाधा उत्पन्न करने के आरोप भी लगाए।

ईवीएम को लेकर विपक्ष के आरोप

चुनाव के नतीजे आने से पहले ईवीएम एवं वीवीपैट के मुद्दे पर कांग्रेस, सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस सहित 22 प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने मंगलवार को चुनाव आयोग का रुख किया और उससे यह आग्रह किया कि मतगणना से पहले बिना क्रम के मतदान केंद्रों पर वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाए।

निर्वाचन आयोग ने विपक्ष की इस मांग को खारिज कर दिया था। हालांकि केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि विपक्ष को चुनाव में हार के लिये ईवीएम पर ठीकरा फोड़ने की बजाए यथार्थ को गरिमापूर्ण ढंग से स्वीकार करना चाहिए ।

सिख दंगे पर सैम पित्रोदा का बयान


1984 के सिख विरोधी दंगों पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के गुरू सैम पित्रोदा के बयान ने राजनीतिक भूचाल ला दिया था। दरअसल सैम ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि अब क्या है 84 का? आपने क्या किया पांच साल में उसकी बात करिए। 84 में हुआ तो हुआ। आपने क्या किया? जिसके बाद खुद राहुल गांधी ने उनसे किनारा कर लिया था। हालांकि सैम पित्रोदा ने बाद में अपनी "खराब" हिंदी पर हवाला देते हुए  अपनी टिप्पणी को सही ठहराया। अपनी टिप्पणी के लिए माफी माँगने की बात तो दूर, वह अपनी टिप्पणियों के लिए "आगे बढ़ें" भी कहा था। 

प्रधानमंत्री मोदी का राजीव गांधी पर वार


 प्रधानमंत्री मोदी ने एक चुनावी रैली में राहुल के दिवंगत पिता पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम लिये बगैर कहा था 'आपके पिताजी को आपके राज दरबारियों ने गाजे-बाजे के साथ मिस्टर क्लीन बना दिया था। लेकिन देखते ही देखते भ्रष्टाचारी नम्बर 1 के रूप में उनका जीवनकाल समाप्त हो गया।’’ जिसके बाद राहुल गांधी समेत कई कांग्रेसी नेताओं से प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर सख्त ऐतराज जताते हुए उनकी ‘‘हताशा’’ और ‘‘हार के डर’’ बताया था। 

साध्वी प्रज्ञा के बयान बीजेपी के लिए बने सिरदर्द

भाजपा ने 2008 के मालेगांव विस्फोट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भोपाल लोकसभा सीट की भाजपा प्रत्याशी बनाया था जिसके साथ ही राजनीति में भूचाल आ गया था। हालांकि बीजेपी ने साध्वी का बचाव करने की कोशिश की थी। लेकिन साध्वी के चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए बयानों ने पार्टी को मुश्किल में डाल दिया था। 
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को उन्होंने देशभक्त करार दिया था। प्रज्ञा की देशभर में किरकरी हो गई थी। भाजपा ने उसके इस बयान से दूरी बना ली थी, जबकि विपक्षी दलों ने इसकी घोर निंदा करने के साथ-साथ इस बयान को देशद्रोही बयान तक बता दिया था। हालांकि बाद में प्रज्ञा ने अपने बयान पर माफी मांगी ली थी। लेकिन विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। 26:11 के मुम्बई आतंकी हमले में शहीद हुए पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे पर प्रज्ञा की टिप्पणी पर भी जमकर बवाल हुआ था। भोपाल लोकसभा चुनाव में साध्वी के प्रतिद्वंदी और कांग्रेस के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह ने शहीदों के बारे में विवादित बयान नहीं देने की सलाह दी वहीं भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों के संगठन आईपीएस एसोसिएशन ने साध्वी के बयान की निंदा की थी।

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