Elections

मोदी सरकार ने ‘नल से हर घर जल’ योजना के लिए कसी कमर, लेकिन देना होगा संसाधनों के सदुपयोग बल

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

देश के प्रत्येक परिवार को 2024 तक 'नल से जल' मुहैया कराने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए मोदी सरकार ने कमर कस ली है। हालांकि देश में भूजल के लगातार गिरते स्तर के बीच प्रति व्यक्ति प्रति दिन पानी की आपूर्ति की मात्रा तय करना, जल स्रोतों एवं उनकी रिचार्ज क्षमता का पता लगाना एवं वाटर टेबल के अनुरूप तकनीकी जानकारी जुटाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि देश के बड़े भूभाग में हर साल जल संकट उत्पन्न होने, भूजल स्तर लगातार नीचे जाने और पानी के पारंपरिक स्रोतों के धीरे धीरे नष्ट होने के कारण चुनौती बढ़ गई है । ऐसे में सरकार को '‘ जल जीवन मिशन ’' को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए न सिर्फ बजटीय आवंटन बढ़ाना होगा बल्कि इस क्षेत्र में निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करना होगा।

2011 की जनगणना के मुताबिक देश के कुल 24 करोड़ परिवारों में से 7 करोड़ परिवार ही शोधित जल हासिल कर रहे हैं।

बजटीय दस्तावेज के मुताबिक, ग्रामीण परिवारों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिये 2019..20 में लगभग 27 लाख जल स्रोत की प्रयोगशाला में जांच की जानी है । इस अवधि में 7000 बसावटों को कवर किया जाना है। हालांकि मंत्रालय ने पाइपयुक्त जल आपूर्ति से कवर होने वाले ग्रामीण परिवारों के संबंध में कोई लक्ष्य सूचित नहीं किया है । 

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के पूर्व सचिव शशि शेखर का कहना है कि बजट बढ़ाने से ज्यादा जरूरत जल का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करने की है।

शेखर ने ‘भाषा’ से कहा, ‘‘ सरकार ने बजट में 'जल जीवन मिशन' के तहत 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में नल से पानी उपलब्ध कराने की बात कही है और इसके लिये 10 हजार करोड़ रूपये का वित्तीय परिव्यय तय किया है । ’’

उन्होंने कहा कि हर घर नल से जल पहुंचाने की योजना बड़ी और चुनौतीपूर्ण है । इसके लिये सबसे पहले उन गांव की सूची तैयार करनी होगी जहां पानी पहुंचाना है। साथ ही यह भी तय करना होगा कि पानी कहां से और किन स्रोतों से पहुंचाया जायेगा ।

पूर्व सचिव ने कहा कि इस बात का पता लगाना होगा कि उन जल स्रोतों से कितना पानी रिचार्ज होता है । इस बारे में तकनीकी सूचना एकत्र करनी होगी । ‘‘ यह तय करना होगा कि सरकार प्रति व्यक्ति प्रति दिन कितना पानी देना चाहती है । ’’ उन्होंने कहा कि हमें यह देखना होगा कि अगर किसी जल स्रोत का रिचार्ज 100 यूनिट प्रतिदिन है तो कितना पानी जारी करें कि वाटर टेबल नीचे नहीं जाए ।

शेखर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के तहत विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी की उपलब्धता 25 लीटर तय की है । अब सरकार को इसी के अनुरूप प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी की आपूर्ति की मात्रा तय करनी होगी। 

यह पूछे जाने पर कि इस योजना के लिये क्या सरकार ने बजटीय आवंटन का ब्यौरा उपलब्ध कराया है, शशि शेखर ने कहा कि यह योजना इस सरकार का सबसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है । सरकार ने इस पर 10000.66 करोड़ रूपये खर्च करने की बात कही है । बजटीय आवंटन का सम्पूर्ण ब्यौरा नहीं है लेकिन यह समझना होगा कि यह नयी योजना है जिसमें अनेक विषयों का ध्यान रखना होगा । स्वच्छता मिशन, शौचालय योजना को भी पहले वर्ष ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था ।

उन्होंने कहा कि संभावना है कि इस योजना के लिये कारपोरेट सामाजिक दायित्व :सीएसआर: के तहत धन जुटाने पर जोर हो ।

जल विशेषज्ञ शंकर आचार्य इस संबंध में देश में बड़े बड़े बांध बनाने के कार्यक्रम का उल्लेख करते हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2011 तक देश में बड़े-बड़े बांध बनाने और सिंचाई सुविधाओं का ढांचा खड़ा करने पर भारी भरकम सात लाख करोड़ रुपये निवेश किये गए लेकिन अब तक का अनुभव बताता है कि इन सुविधाओं का प्रभावी उपयोग नहीं हुआ है। उदाहरण के लिए भारत में नहर सिंचाई व्यवस्था का प्रभावी इस्तेमाल 15 से 16 प्रतिशत है ।

गौरतलब है कि बजट पेश करते हुए सीतारमण ने कहा था, 'भारत में पानी की सुरक्षा और सभी भारतीयों को साफ पेयजल उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इस दिशा में एक बड़ा कदम जल शक्ति मंत्रालय का गठन है।' 'जल जीवन मिशन' के तहत 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में 'हर घर जल' के लिए राज्यों के साथ मिलकर मंत्रालय काम करेगा।

बजट में ऐलान से पहले जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोमवार को ‘जल शक्ति अभियान’ शुरू किया। इसके अंतर्गत देश के 256 जिलों के अधिक सूखा प्रभावित 1592 खंडों पर जोर दिया जाएगा। यह अभियान पांच बिंदुओं- जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन, परपंरागत और दूसरे जल निकायों के नवीनीकरण, जल के दोबारा इस्तेमाल और ढांचों के पुनर्भरण, जलविभाजन विकास और गहन वनीकरण तथा पेयजल की सफाई पर केंद्रित होगा।

DO NOT MISS