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ममता की रैली में विपक्षी दलों ने भरी मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने की हुंकार

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

कोलकाता - आगामी लोकसभा चुनाव में सभी विपक्षी दलों को साथ लाने की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कवायद के तहत शनिवार को यहां आयोजित विशाल रैली में एक दर्जन से अधिक विपक्षी दलों के नेता एक मंच पर नजर आए और उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने की हुंकार भरी. 

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता की ओर से आयोजित इस रैली में शामिल होकर 20 से अधिक वरिष्ठ नेताओं ने अपनी एकजुटता प्रदर्शित की.  

उन्होंने कहा, ‘‘मोदी सरकार की ‘एक्सपायरी डेट’ (उपयोग करने की अवधि) खत्म हो गई है. ’’ इन नेताओं ने अपनी पार्टियों के बीच के मतभेद को दरकिनार करने का आह्वान करते हुए कहा कि वे चुनावों के बाद प्रधानमंत्री पद के मुद्दे पर फैसला कर सकते हैं.  

कुछ नेताओं ने सुझाव दिया कि विपक्ष को हर चुनाव क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ अपना एक संयुक्त उम्मीदवार उतारना चाहिए.  

उन्होंने अप्रैल-मई में संभावित लोकसभा चुनावों से पहले और संयुक्त रैलियां करने का फैसला किया.  अगली रैलियां नई दिल्ली और आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती में होंगी.  

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस रैली में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन पार्टी ने लोकसभा में अपने नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी को प्रतिनिधि बनाकर इस रैली में भेजा.  

रैली को संबोधित करते हुए खड़गे ने सोनिया गांधी का एक संदेश पढ़कर सुनाया, जिसमें पार्टी की पूर्व अध्यक्ष ने रैली की सफलता की शुभकामनाएं दी थीं.  

जनसैलाब की मौजूदगी में हुई इस रैली में पूर्व प्रधानमंत्री एवं जनता दल सेक्यूलर प्रमुख एच डी देवेगौड़ा, तीन वर्तमान मुख्यमंत्री - चंद्रबाबू नायडू (तेलुगु देशम पार्टी), एचडी कुमारस्वामी (जनता दल सेक्यूलर) और अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी), छह पूर्व मुख्यमंत्री - अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी), फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला (दोनों नेशनल कांफ्रेंस), बाबूलाल मरांडी (झारखंड विकास मोर्चा), हेमंत सोरेन (झारखंड मुक्ति मोर्चा) और इसी हफ्ते भाजपा छोड़ चुके गेगांग अपांग, आठ पूर्व केंद्रीय मंत्री- मल्लिकार्जन खड़गे (कांग्रेस), शरद यादव (लोकतांत्रिक जनता दल), अजित सिंह (राष्ट्रीय लोक दल), शरद पवार (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी), यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, शत्रुघ्न सिन्हा और राम जेठमलानी ने हिस्सा लिया.  

इनके अलावा, राजद नेता एवं बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी, बसपा सुप्रीमो मायावती के प्रतिनिधि एवं राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा, पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल और जानेमाने दलित नेता एवं गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी भी मंच पर नजर आए.  

रैली को सबसे अंत में संबोधित करती हुईं ममता ने कहा कि मोदी सरकार की ‘एक्सपायरी डेट (उपयोग करने की अवधि)’ खत्म हो गई है.  उन्होंने कहा कि राजनीति में शिष्टता होती है लेकिन भाजपा इसका पालन नहीं करती और जो भाजपा के साथ नहीं होता उसे वे चोर बता देते हैं.  रैली में ममता ने ‘बदल दो, बदल दो, दिल्ली की सरकार बदल दो’ का नारा भी दिया. 

प्रधानमंत्री पद के लिए संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार के मुद्दे पर ममता ने कहा कि विपक्षी दल एक साथ मिलकर काम करने का वादा करते हैं और प्रधानमंत्री कौन होगा, इस पर फैसला लोकसभा चुनाव के बाद होगा. 

बसपा सुप्रीमो मायावती के प्रतिनिधि के तौर पर रैली में आए पार्टी के वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा-सपा गठबंधन केंद्र की ‘दलित-विरोधी’ और ‘अल्पसंख्यक-विरोधी’ राजग सरकार के अंत की शुरुआत है. 

उन्होंने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने में सपा-बसपा गठबंधन के बाद यह रैली अगला कदम है. 

मिश्रा ने कहा कि इस ‘सफल’ रैली से पुष्टि हो गई है कि बाबा साहेब आंबेडकर द्वारा लिखे गए संविधान को सुरक्षित रखने के लिए भाजपा को हराना जरूरी है. 

मिश्रा के सुर में सुर मिलाते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि कई लोगों को लग रहा था कि सपा एवं बसपा गठबंधन नहीं कर पाएंगे.  

संभवत: प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की तरफ इशारा करते हुए अखिलेश ने कहा, ‘‘अब भाजपा सोच रही है कि उत्तर प्रदेश में कम से कम एक सीट कैसे जीतें. ’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘सबका साथ सबका विकास की बातें कहने वालों ने देश में जहर घोलकर एक-दूसरे को लड़ाया है.  हम देश और संविधान बचाने के लिए साथ लड़ेंगे. ’’ 

संभवत: पार्टियों के बीच मतभेद की तरफ इशारा करते हुए कांग्रेस नेता खड़गे ने एक शायरी सुनाई जिसका मतलब था कि इन दलों के दिल मिले या न मिलें, लेकिन उन्हें एक-दूसरे का हाथ थामे रखना चाहिए.  

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने कहा कि भाजपा ने उनकी सरकार गिराने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि पिछले 70 साल में देश में मजबूत क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों का उदय हुआ है और उन्होंने अपने राज्यों के हितों की रक्षा में अहम भूमिका निभाई है.  

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोगों से केंद्र की ‘‘खतरनाक’’ भाजपा सरकार को किसी भी कीमत पर हराने का आह्वान किया. 

उन्होंने कहा कि देश गंभीर संकट के दोराहे पर है.  देश और लोकतंत्र को बचाने के लिए मोदी सरकार को तुरंत बदलने की जरूरत है.  

तृणमूल कांग्रेस की विशाल रैली में उन्होंने कहा, ‘‘अगर (नरेंद्र) मोदी-(अमित) शाह की जोड़ी 2019 का चुनाव जीतकर देश में शासन करती रही तो वह संविधान को बदल देगी और कभी चुनाव नहीं करवाएगी.  जर्मनी में हिटलर ने जो किया था, वही होगा. ’’ 

उन्होंने भाजपा पर धर्म के नाम पर लोगों के बीच दुश्मनी फैलाने का आरोप लगाया.
 

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