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चुनावी मैदान में भाजपा को चुनौती देने के लिए उतरे कांग्रेस के दो कद्दावर मुख्यमंत्रियों के लाल

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:


लोकसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी चुनौती देने की कोशिश कर रही कांग्रेस के दो कद्दावर मुख्यमंत्रियों कमलनाथ और अशोक गहलोत के पुत्र भी इस बार चुनावी समर में अपनी किस्मत आजमाएंगे।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के पुत्र नकुल नाथ अपने पिता की परंपरागत सीट छिंदवाड़ा से चुनाव लड़ रहे हैं तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत जोधपुर से चुनाव लड़ रहे हैं।

नकुल नाथ और वैभव गहलोत पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। वैसे, हाल के कुछ वर्षों में कांग्रेस के कई पूर्व मुख्यमंत्रियों के पुत्रों ने चुनावी राजनीति में कदम रखा और वे सफल भी रहे।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा रोहतक से सांसद हैं और इस बार भी चुनाव लड़ रहे हैं।

असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई के पुत्र गौरव गोगोई भी लोकसभा सदस्य हैं तो हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह विधायक हैं।

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह फिलहाल राज्य की कमल नाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

इधर कांग्रेस ने चौंकाने वाला कदम उठाते हुए 'दागी' नेता और भाजपा के पूर्व सांसद बाबू कटारा को गुजरात की दाहोद लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। बाबू 2017 में कांग्रेस में शामिल हुए थे।

इसके अलावा पार्टी ने भरूच सीट शेर खान पठान को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने अपने करियर में कोई चुनाव नहीं जीता। 

कांग्रेस ने बुधवार रात दोनों नेताओं के नाम का ऐलान किया और बृहस्पतिवार को उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल किये। इसी के साथ कांग्रेस ने गुजरात की सभी 26 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार उतार दिये हैं। राज्य में एक चरण में 23 अप्रैल को मतदान होना है।

कटारा (58) दाहोद सीट से 1999 और 2004 में भाजपा सांसद रह चुके हैं।

कटारा को 2007 में अपनी पत्नी और बेटे के पासपोर्ट पर एक महिला और उसके बेटे की कथित रूप से तस्करी की कोशिश में नयी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था।

मानव तस्करी के आरोपों में अपनी गिरफ्तारी के बाद 2008 में कटारा को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। वह गुजरात की राजनीति में हाशिये पर चले गए।

वर्ष 2017 में एक बार फिर वह चर्चा में आए जब विधानसभा चुनाव के समय भाजपा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते उन्हें निलंबित कर दिया था।

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