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महागठबंधन को लेकर कांग्रेसी नेता चिदंबरम ने दिया बड़ा बयान, बीजेपी को हराना है तो...

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने गुरुवार को कहा कि पार्टी के लिए राज्य वार गठबंधन फायदेमंद हैं और भाजपा को शिकस्त देने का बेहतरीन तरीका है . कर्नाटक उपचुनाव में कांग्रेस-जनता दल (सेकुलर) गठबंधन की जीत से उत्साहित चिदंबरम ने कहा कि इसी तरह के गठजोड़ अन्य राज्यों में भी करने की जरूरत है .

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यहां कांग्रेस दफ्तर में पत्रकार वार्ता में कहा, ‘‘ कर्नाटक में हुए गठबंधन ने नतीजे दिए हैं . इसी तरह के गठबंधन विभिन्न राज्यों में करने चाहिए .

पश्चिम बंगाल में गठबंधन के बारे में पूछने पर चिदंबरम ने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा, ‘‘ इस संबंध में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी निर्णय करेगी .’’

वहीं दूसरी तरफ  चिदंबरम ने बृहस्पतिवार को कहा कि मोदी सरकार राजकोषीय संकट से उबरने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को ‘अपनी मुठ्ठी में करने’ का प्रयास कर रही है . चिंदबरम ने आगाह कि इस तरह के प्रयासों के चलते ‘‘भारी मुसीबत’’ खड़ी हो सकती है .

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने केंद्रीय बैंक के निदेशक मंडल में अपने चहेतों को भर दिया है . सरकार का प्रयास है कि 19 सितंबर को होने वाली आरबीआई निदेशक मंडल की बैठक में उसके प्रस्ताव को मंजूर कर लिया जाए .

पूर्व वित्तमंत्री ने यहां संवादाताओं से कहा, ‘‘सरकार के सामने राजकोषीय घाटे का संकट खड़ हो गया है.. वह इस चुनावी वर्ष में खर्च बढ़ाना चाहती है . सारे रास्ते बंद देखने के बाद हताशा में सरकार ने आरबीआई से उसके आरक्षित कोष से एक लाख करोड़ रुपये की मांग की है .’’

उन्होंने दावा किया कि यदि आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल अपने रुख पर कायम रहते हैं तो केंद्र सरकार की योजना आरबीआई कानून 1934 की धारा-सात के तहत दिशानिर्देश जारी करने की है . सरकार केंद्रीय बैंक को एक लाख करोड़ रुपये सरकार के खाते में हस्तांतरित करने का निर्देश दे सकती है .

चिदंबरम ने कहा, ‘‘इस समय आरबीआई निदेशक मंडल की 19 नवंबर की बैठक महत्वपूर्ण हो गई है . इसमें कोई निर्णय हो सकता है .’’ उन्होंने कहा, ‘‘यदि आरबीआई सरकार से अलग राय रखती है या आरबीआई के गवर्नर इस्तीफा देते हैं तो भारी मुसीबत पैदा हो सकती है .’

(इनपुट - भाषा)
 

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