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चुनाव पूर्व नहीं, तो चुनाव बाद गठबंधन जरूर होगा : अशोक गहलोत

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

लोकसभा चुनाव के लिए कुछ राज्यों में कांग्रेस को विपक्षी गठबंधन से अलग रखे जाने और कई जगहों पर तालमेल में सामने आ रही दिक्कतों की पृष्ठभूमि में पार्टी के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को कहा कि क्षेत्रीय दलों की कुछ 'मजबूरियां' हो सकती हैं जिस वजह से वे चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं कर रही हैं, लेकिन चुनाव बाद भाजपा विरोधी ताकतों का गठबंधन होकर रहेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आर्थिक आंकड़े तोड़मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाते हुए गहलोत ने दावा किया कि अगर जनता मोदी के 2014 से पहले के भाषणों को सुन ले तो कांग्रेस को प्रचार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

गहलोत ने न्यूज एजेंसी को दिए साक्षात्कार में कहा, 'ऐसा नहीं है कि कांग्रेस गठबंधन नहीं करना चाहती। कांग्रेस के नेता और राहुल गांधी इसको लेकर स्पष्ट हैं कि हमें गठबंधन करना है और गठबंधन के साथियों के साथ मैदान में उतरना है।' 

उन्होंने कहा, ' भाजपा के पास बड़े साधन है। वे साधनों के दुरुपयोग और धनबल के आधार पर सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं। कांग्रेस की अपनी मजबूरियां हैं। कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है। अगर कांग्रेस ढंग से गठबंधन नहीं करे और हमारे कार्यकर्ता गठबंधन के साथी के साथ नहीं जुड़े तो फिर गठबंधन का फायदा क्या हुआ ?' उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में सपा और बसपा द्वारा गठबंधन से अलग रखे जाने के सवाल पर गहलोत ने कहा, 'सपा और बसपा की भी मजबूरियां हैं। वे कई बार मजबूरियों के चलते कांग्रेस के साथ नहीं आ पाते हैं। वैसे, चुनाव पूर्व और चुनाव के बाद गठबंधन होकर रहेगा। जनता का दबाव पड़ेगा।' 

आम आदमी पार्टी और कुछ अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन को लेकर ऊहापोह की स्थिति पर उन्होंने कहा, 'उन पार्टियों के अपने निजी हित हैं। ये पार्टियां कांग्रेस के वोटबैंक पर कब्जा कर बनी हैं। आखिरकार ये पार्टियां भी देश का हित देखेंगी और साथ आएंगी। अगर चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं होता है तो चुनाव बाद होगा।' 

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा ने अपने गठबंधन से कांग्रेस को अलग रखा। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में भी वाम दलों के साथ कांग्रेस का गठबंधन नहीं हो पाया। इसी तरह बिहार में सीट बंटवारे तथा दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ तालमेल को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। 

गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के आंकड़ों को तोड़मरोड़ कर पेश कर रही है तथा बेरोजगारी के आंकड़े सामने आने से रोक रही है। राजस्थान के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर जनता चुनाव से पहले के मोदी के भाषणों को सुन ले तो कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में प्रचार की जरूरत नहीं पड़ेगी।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘जो उनका बॉडी लैंग्वेज है, जिस तरह से वो बातें करते हैं वैसा हमने किसी प्रधानमंत्री में नहीं देखा।’’’ 

उन्होंने दावा किया कि देश में नाम का लोकतंत्र है। भय है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है। कोई कुछ बोले तो उसे देशद्रोही बता दिया जाता है।

सोशल मीडिया में पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में फैलाई गई गलत सूचनाओं का उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा, ‘‘पंडित नेहरू जिनकी देश और दुनिया में अमिट छाप है, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, उनके खिलाफ ये लोग जो कर रहे हैं और नौजवानों को गुमराह कर रहे हैं वह पाप है। ये पाप कर रहे हैं।’’ 


 

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