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VIDEO: R. भारत के राहुल के खुलासे पर मचा सियासी हड़कंप, अरुण जेटली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस से मांगा जवाब

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

राहुल का हाथ घोटालेबाजों के साथ, खुलासे के पहले पार्ट में बीते मंगलवार को रिपब्लिक भारत ने आपको बताया था कि कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के संबंध 2जी घोटाले के आरोपी संजय चंद्रा से किस तरह के थे और उन्होंने यूनिटेक के साथ किस तरह पैसे का लेनदेन किया था। लेकिन राहुल गांधी की साख और निष्ठा पर सवाल इससे भी बड़े हैं।

घोटालेबाजों और राहुल के रिश्तों की दूसरी कड़ी में हमने दिखाई था कि कैसे राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के तार 2013 में हुए एनएसईएल घोटाले में आरोपी जिग्नेश शाह से जुड़े हुए हैं। 

रिपब्लिक भारत के इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है और बीजेपी ने सीधा- सीधा राहुल गांधी पर सवाल खड़े किए हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिन में कुछ मीडिया संस्थानों ने कांग्रेस अध्यक्ष के बारे में कुछ खबरें छापी हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने खुद उन खबरों का निजी तौर पर अध्ययन किया और इस विश्लेषण को सार्वजनिक करना जरूरी है। इस व्यक्ति (राहुल गांधी) ने अपने जीवन में कभी कोई व्यवसाय नहीं किया। लेकिन वह अच्छी जीवनशैली के साथ रहते हैं, विदेश में छुट्टी बिताते हैं।’’ 

जेटली ने कहा कि मीडिया के एक खुलासे में सामने आया कि दक्षिण दिल्ली में गांधी परिवार के स्वामित्व वाला एक फॉर्म हाउस है जिसके स्वामी अब परिवार की मौजूदा पीढ़ी के भाई-बहन हैं।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘समय समय पर ऐसे लोगों को किरायेदार बनाया जाता है जिनमें से कई को कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के सत्ता में रहने पर मदद की दरकार थी। किरायेदारों के नामों में ऐसे ही प्रमुख नाम एफटीआईएल के जिग्नेश शाह और यूनीटेक बिल्डर के संजय चंद्रा के हैं।’’

ये दोनों ही अलग अलग आर्थिक अपराधों के मामलों में आरोपी हैं।

जेटली ने कहा कि इस तरह के एक दूसरे को फायदा पहुंचाने वाले सौदों में उन लोगों के अलावा कौन शामिल होगा जिन्हें सरकार के संरक्षण की जरूरत होती है।

कांग्रेस पर हमला बोलते हुए भाजपा नेता ने कहा कि पार्टी ने गांधी परिवार के लिए पूंजी पैदा करने का कार्यक्रम चलाया है। किरायेदारों को पहले ही फायदा पहुंचाकर किराये वसूले जाते हैं। इन किरायेदारों को कभी दिल्ली में रहने की जरूरत ही नहीं लगती क्योंकि उनका दिल्ली में कोई कामकाज नहीं है।

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