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क्या विरोध के नाम पर भारत में कई पाकिस्तान बनाने की साजिश हो रही है? जाने इस मुद्दे पर अर्नब की राय

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

दिल्ली में विधानसभा चुनाव के  लिए 8 फरवरी को मतदान होना है। लेकिन चुनाव से पहले कोई भी नेता विकास की बात नहीं कर रहा है। चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा है हिंदू-मुसलमान, हिदुस्तान और पाकिस्तान। दिल्ली के वोटर कह रहे हैं कि नेता हमारी कलोनीयों में तो नहीं आते लेकिन शाहीन बाग हर दिन जा रहे हैं। क्या दिल्ली में सिर्फ शाहीन बाग ही है। दूसरी कोई जगह नहीं है। जिस शाहीन बाग में जिन्ना की आजादी के नारे लगे, जिस शाहीन बाग में सरकार को गिराने का शोर हो। अगर वहां भारत से ज्यादा पाकिस्तान की बात हो तब ये सवाल जरूर उठेगा। क्या दिल्ली का चुनाव भारत VS पाकिस्तान का चुनाव है? लेकिन जो लोग चुनाव में पाकिस्तान का एजेंडा चला रहे हैं। देश उन्हें बर्दाश्त नहीं करेगा ।

दिल्ली का चुनाव भारतvs पाकिस्तान बनाने की कोशिश की जा रही है। जिसने नारे लगाए, जिन्ना वाली आजादी, जिसने नारे लगाए, हिंदुत्व की कब्र खुदेगी, जिसने धमकी दी मुसलमान तलवार उठा लेंगे। वही दिल्ली के चुनाव में पाकिस्तान को ला रहा है। दिल्ली के चुनाव में पाकिस्तान तब आया जब मणिशंकर अय्यर लाहौर से सीधा शाहीनबाग पहुंचे। दिल्ली के चुनाव में पाकिस्तान तब आया जब अमानतुल्ला खान ने कहा अगर 12%  मुसलमान एक हो गए तो मोदी को हरा देंगे। दिल्ली के चुनाव में पाकिस्तान तब आया जब टुकड़े गैंग की आइशी घोष ने शाहीन बाग से कहा हमारी लड़ाई CAA के खिलाफ है। लेकिन हम कश्मीर की भी लड़ाई लड़ेंगे, ये पाकिस्तान नहीं तो किसकी सोच है। नेता शाहीन बाग में क्या कह रहे हैं वो कह रहे हैं जो कौम बाबरी मस्जिद के खोने पर खामोश रही वो संविधान के खोने पर शांत नहीं रहेगी। ये वही जुबान है जो पाकिस्तान बोलता है । शाहीन बाग में पोस्टर पर लिखा है मोदी शाह से आजादी क्या है? इस सरकार से आजादी क्या है? अगर ये आंदोलन है तो ये हिंदुस्तान का नहीं पाकिस्तान का आंदोलन है।


शाहीन बाग में लोग जिन्ना की आजादी तो कहते हैं लेकिन वंदेमातरम नहीं कहते, कश्मीर मांगे आजादी तो कहते हैं लेकिन हिंदुस्तान जिंदाबाद नहीं कहते। ये पाकिस्तान वाला प्रॉपेगेंडा, दिल्ली में क्या कर रहा है। जब शाहीन बाग में  ऊं का अपमान होता। जब स्वास्तिक पर सवाल होता है। जब हिंदुत्व की कब्र खोदने का ऐलान होता है जब अपशब्दों के साथ हिंदुत्व लिखा जाता है। तब ये कहना पड़ता है दिल्ली में पाकिस्तान आ गया है। जब शहीन बाग में नेता कहते हैं कि मुसलमानों से सवाल पूछा जाएगा। हिंदुओं से नहीं पूछा जाएगा. जब भड़काने वाले कहते हैं कि हिंदू तो 800 साल तक मुसलमानों के गुलाम थे। तब लगता है कि ये दिल्ली का चुनाव है या फिर भारत VS पाकिस्तान का। 

दिल्ली का चुनाव भारत VS पाकिस्तान न लगता लेकिन जब CAA का विरोध सिर्फ शाहीन बाग, जामिया और सीलमपुर में होगा., जंतर मंतर सिविल लाइन और संतनगर में नहीं लो ये सवाल उठेगा कि क्या चुनाव भारत VS पाकिस्तान है? दिल्ली चुनाव के पहले कहा जा रहा है कि पुलवामा की जांच हो। दिल्ली चुनाव के पहले पाकिस्तान को क्लीन चिट दी जा रही है। तब ये सवाल क्यों न हो कि ये चुनाव हिंदुस्तान का है या पाकिस्तान? नागरिकता कानून के नाम पर इमरान खान ने झूठ बोला कि मुसलमानों को भारत छोड़ना पड़ेगा और यही झूठ हिंदुस्तान में विपक्ष का हर नेता कर रहा है।

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