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चुनाव से पहले तहलका मचाने वाली ख़बर। क्या राहुल गांधी और संजय भंडारी के तार जुड़े हैं?

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

2019 चुनाव से पहले आज ये खबर राहुल गांधी की राजनीति को हमेशा के लिए बदलकर रख सकती है, क्योंकि जिस राफेल के नाम पर वो लगातार प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते रहे हैं। उस राफेल डील से जुड़ा एक सच राहुल गांधी के लिए परेशानी बन सकता है।

हम आपको बताते हैं कि राहुल गांधी की जांच के घेरे में आए हथियारों के सौदागर संजय भंडारी से क्या रिश्ता है और कैसे राहुल गांधी, उनके जीजा रॉबर्ट वाड्रा, उनकी बहन प्रियंका गांधी, हथियारों के सौदागर संजय भंडारी और एनआरआई बिजनेसमैन सीसी थंपी का कनेक्शन एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ता है।

जो गांधी और वाड्रा परिवार को ज़मीनें बेचा करता था और बाद में यही ज़मीनें उनसे मोटे दाम चुकाकर  वापस ले लिया करता था। ये खुलासा ऑनलाइन वेबसाइट Opindia ने किया और इस रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गांधी के परिवार के संजय भंडारी और सीसी थंपी से रिश्ते रहे हैं। आज हम देश की राजनीति को हिला देने वाली इसी रिपोर्ट को पन्ना दर पन्ना आपके सामने रखेंगे।

दरअसल ऑनलाइन वेबसाइट OpIndia ने राहुल गांधी, उनके जीजा रॉबर्ट वाड्रा, हथियारों के सौदागर संजय भंडारी और ED के रडार पर आए एनआरआई बिजनेसमैन सीसी थंपी के रिश्तों पर एक खबर छापी है।

OpIndia ने गांधी और वाड्रा परिवार के ज़मीन सौदों की भी डिटेल दी है। जिसके मुताबिक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और रॉबर्ट वाड्रा ने ज़मीनें ना सिर्फ बाज़ार से सस्ते दामों पर खरीदी बल्कि कुछ मामलों में इन्हें बाद में उसी शख्स को बेच दिया जिससे ज़मीन खरीदी गई थी। इस व्यक्ति का नाम है एचएल पहवा..

  • एचएल पहवा के साथ गांधी परिवार की लैंड डील

आपको बताते हैं कि कैसे पहवा के तार सीसी थंपी और भंडारी से जुड़े हैं। दरअसल राहुल ने एचएल पहवा से एक ज़मीन खरीदी, ये 6.5 एकड़ ज़मीन हरियाणा के हसनपुर में है। आरोप है कि ये ज़मीन कम दामों पर खरीदी गई। ज़मीन का ये सौदा 26 लाख 47 हज़ार रुपये का था।

इस सौदे के लिए पेमेंट दो चेक के ज़रिए की गई। पहली बार 12 जनवरी 2008 को चेक से 24 लाख रुपये की पेमेंट की गई जबकि दूसरी पेमेंट के लिए 17 मार्च 2008 को 2 लाख 47 हज़ार रुपये का चेक दिया गया।

इसके अलावा पहवा ने 3 मार्च 2008 को रॉबर्ट वाड्रा को भी 36 लाख 9 हज़ार रुपये में एक ज़मीन बेची। इस सौदे की डीड में ज़मीन बेचने वाले के तौर पर तो एचएल पहवा का नाम है, लेकिन खरीदने वाले की जगह रॉबर्ट वाड्रा का नाम नहीं बल्कि महेश नागर के हस्ताक्षर हैं। डील में लिखा गया है कि ये ज़मीन रॉबर्ट वाड्रा ने महेश नागर के ज़रिए खरीदी है।

जैसा कि दस्तावेजों में देखा गया है, फ़ाइल सी पृष्ठ 57 में, इस लेनदेन पर स्टाम्प शुल्क का भुगतान नकद में किया गया था और पहवा द्वारा इसे वापस नहीं लिया गया था। इससे ये बात साफ हो एक अन्य महत्वपूर्ण जानकारी जो दस्तावेजों में दिखाई देती है, वह यह है कि पहवा इस जमीन को 33,22,003 रुपये में बेचना चाहते थे। लेकिन इसे राहुल गांधी को 26,47,000 रुपए में बेचने के लिए राजी हो गए।

इसके अलावा, सिर्फ राहुल गांधी ही नहीं हैं जिनके एचएल पाहवा के साथ संबंध हैं। बल्कि प्रियंका गांधी वाड्रा और रॉबर्ट वाड्रा ने भी उनके साथ जमीन के सौदे किए हैं। इसके बाद 2012 की एक रिपोर्ट में खबर आई, “ललित नागर के भाई महेश नागर ने रॉबर्ट वाड्रा की ओर से न केवल हरियाणा में बल्कि राजस्थान में भी जगह खरीदी है।”

इसी तरह 28 अप्रैल 2006 को प्रियंका गांधी ने भी पहवा से 15 लाख रुपये में एक ज़मीन खरीदी। जिसके लिए दो चेक के ज़रिए पेमेंट की गई। OpIndia के मुताबिक प्रियंका ने बाद में इसी ज़मीन को 84 लाख 15 हज़ार 6 रुपये में बेच दी।

गौर करने वाली बात ये है कि पहवा ने ज़मीन वापस खरीदने के लिए पेमेंट 5 किस्तों में की और इसके लिए फंड की कमी का हवाला दिया गया, कई बार तो ज़मीनें नेगेटिव कैश बैलेंस होने के बावजूद खरीदी गई लेकिन ED की जांच में हैरान करने वाला खुलासा ये हुआ है कि पहवा को एनआरआई बिज़नेसमैन सीसी थंपी से 54 करोड़ रुपये मिले।

संजय भंडारी वही शख्स है जिसके खिलाफ जांच चल रही है और जिसे रॉबर्ट वाड्रा का करीबी माना जाता है। OpIndia की रिपोर्ट से साफ है कि राहुल गांधी ने पहवा से ज़मीन खरीदी और प्रियंका और रॉबर्ट वाड्रा ने भी इसी व्यक्ति से ज़मीनें खरीदीं। बाद में पहवा ने मोटे दामों पर रॉबर्ट-प्रियंका से ज़मीनें वापस खरीद लीं।

  • एचएल पहवा - सीसी थंपी - संजय भंडारी के लिंक

पहवा ने इन ज़मीनों को खरीदने के लिए सीसी थंपी से रकम ली। थंपी, संजय भंडारी का करीबी दोस्त है और दोनों के रिश्ते पहले से जांच के दायरे में हैं। इतना ही नहीं ED को वाड्रा की लंदन वाली प्रॉपर्टी के तार भी थंपी और भंडारी से जुड़ते दिख रहे हैं। संजय भंडारी पर ये भी आरोप लगते रहे हैं कि उसने यूपीए के दौरान राफेल का ऑफसेट पार्टनर बनने की कोशिश की थी, लेकिन राफेल ने संजय को सीधे ना कह दिया था।

OpIndia की रिपोर्ट के मुताबिक 2009 और 2005 में डिफेंस और पेट्रोलियम डील में संजय भंडारी को रिश्वत मिली थी और रिश्वत के इसी पैसे का इस्तेमाल लंदन में प्रॉपर्टी खरीदने में हुआ।

यानी अगर OpIndia की रिपोर्ट को सही माना जाए तो जिस संजय भंडारी पर डील में रिश्वतखोरी के आरोप है वो सीसी थंपी का करीबी है और सीसी थंपी वही शख्स है जो गांधी और वाड्रा परिवार के साथ ज़मीनों का सौदा करता रहा है।

इतना ही नहीं संजय भंडारी ने यूपीए काल में राफेल का ऑफसेट पार्टनर बनने की कोशिश भी की थी। यानी कहीं ना कहीं ये सारा खेल कुछ बड़े नामों, देश के सबसे बड़े राजनैतिक परिवार, और हथियारों के सौदागरों के बीच का लग रहा है। जिसका सच जल्द सामने आ जाएगा।
 

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