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कोयला खनन में सरकार का एकाधिकार खत्म, वित्त मंत्री ने निजी सेक्टर को दी माइनिंग की मंजूरी

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोयला क्षेत्र में सरकार का एकाधिकार समाप्त करने के उपायों की शनिवार को घोषणा करते हुए कहा कि इसके लिए लगभग 50 कोयला प्रखंड पेश किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र को कोयले का वाणिज्यिक उत्खनन करने के लाइसेंस राजस्व में हिस्सेदारी की व्यवस्था के तहत दिए जाएंगे।

वित्त मंत्री ने प्रोत्साहन आर्थिक पैकेज की चौथी किस्त की घोषणा करते हुए यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि निजी क्षेत्र को प्रति टन निर्धारित शुल्क की जगह राजस्व में सरकार की हिस्सेदारी व्यवस्था के आधार पर कोयले का वाणिज्यिक उत्खनन का लाइसेंस दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए नीलामी में लगभग 50 कोयला प्रखंडों को पेश किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि घटिया कोयले के आयात को कम करने और कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इसके अलावा, सरकार कोयला खान क्षेत्र से बाहर पहुचाने के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिये 50,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीकरण और द्रवीकरण को राजस्व साझेदारी में छूट के माध्यम से प्रोत्साहित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि कोयला बेड मीथेन (सीबीएम) के उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जायेगा।

वित्त मंत्री ने भारतीय वायु क्षेत्र को और खुला बनाने की घोषणा की

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय वायु क्षेत्र के उपयोग की पाबंदियों में ढील देने की घोषणा की जिससे विमान कंपनियों को सुविधा और बचत होगी। सरकार का अनुमान है कि वायु क्षेत्र को अधिक खुला करने से नागर विमानन क्षेत्र को प्रति वर्ष लगभग 1,000 करोड़ रुपये का लाभ होगा।

वित्त मंत्री ने आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की चौथी किस्त की घोषणा करते हुए कहा कि भारतीय हवाई क्षेत्र का केवल 60 प्रतिशत स्वतंत्र रूप से उपयोग के लिये उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि अधिक वायु क्षेत्र मिलने से हवाई यात्रा का समय कम होगा और ईंधन की बचत होगी। वित्त मंत्री ने कहा कि निजी भागीदारी के लिये छह और हवाई अड्डों की नीलामी की जायेगी। इसके अलावा, पहले और दूसरे दौर में नीलाम किये गये 12 हवाई अड्डों में निजी कंपनियों के द्वारा 13,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश किया जायेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) के लिये कर व्यवस्था को युक्तिसंगत बनाया गया है। उन्होंने कहा कि विमानन कल-पुर्जों की मरम्मत और एयरफ्रेम रख-रखाव क्षेत्र के तीन साल में 800 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,000 करोड़ रुपये हो जाने की उम्मीद है।