Economy

अनुराग ठाकुर बोले, 'कोरोना से लड़ाई में भारत की हो रही दुनियाभर में तारीफ, गरीबों तक पहुंचा रहे हर संभव मदद'

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

कोरोना वायरस का प्रकोप के चलते लगभग पूरी दुनिया पूरी तरह या आंशिक तौर पर लॉकडाउन में रहने को मजबूर है। जिसके चलते वैश्विक स्तर पर उभरा आर्थिक संकट तमाम देशों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। ऐसे में कई देशों ने संकट की घड़ी में अपने नागरिकों को राहत देने के लिए आर्थिक पैकेजों का ऐलान किए हैं। इसी कड़ी में मोदी सरकार ने भी देश की अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए 20 लाख करोड़ के भारी भरकम आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है। 

इसी महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क से बात करते हुए बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी की सुपर प्लानिंग से भारत की अर्थव्यवस्था में कैसे सुधार आएगा। उन्होंने बताया कि जिस 20 लाख करोड़ रूपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा केंद्र सरकार ने की थी, उसे वो किन क्षेत्रों में और कैसे कैसे लागू करेगी। 

बीजेपी सांसद ने बताया कि दुनिया भर में भारत के कोरोना से लड़ने के प्रयासों की सराहना हो रही है। उन्होंने कहा कि आर्थिक पैकेज से भारत की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। उन्होंने आगे पैकेज की पाई-पाई का ब्यौरा देते हुए कहा-

• सारा पैसा सीधे गरीबो के बैंक खातों में गया है

• 20.5 करोड़ जनधन खाता धारकों के ऊपर 4100 करोड़ रूपये खर्च किये गए

• 2 करोड़ 20 लाख वृद्ध अथवा विधवा पेंशन वालों को 2800 करोड़ दिए गए 

• 7 करोड़ उज्जवला योजना के तहत गैस सिलिंडर मुफ्त में भरे गये जिसमें 9000 करोड़ खर्च हुए 

• 9 करोड़ किसानों के बैंक खातों में सीधा 18000 करोड़ डाले गए 

• माध्यम और छोटे उद्योगों को बिना गारंटी के 3 लाख करोड़ रूपये के लोन का प्रावधान 

• 15% इक्विटी एनपीए खाताधारकों को 75 लाख का प्रावधान 

• इसमें सभी वर्ग शामिल हैं 

• किसानों को फसल उगाने के लिए मुफ्त में समान दिया गया और एमएसपी का ध्यान रखा गया जिसमें 1800 करोड़ रूपये लगे 

अनुराग ने आगे आरबीआई का धन्यवाद किया और कहा कि उनके द्वारा उठाये नए कदम देश को प्रगति की दिशा में ले जायेंगे। उन्होंने कहा कि इन नए प्रावधानों के तहत कर्ज लेने वालों को लाभ मिलेगा। चाहे व्यापार खोलने के लिए कर्ज चाहिए या पढ़ाई के लिए, आरबीआई ने सबकी ज़रूरतों का ध्यान रखा है।  जिन सवा 4 लाख करोड़ किसानों ने क़र्ज़ ले रखा था, उन्हें ब्याज समेत पैसे लौटाने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है। साथ ही सुकन्या समृद्धि योजना के तहत सभी बुजुर्गों का ध्यान रखा गया है। जिन्हें ज्यादा ब्याज की जरुरत थी, उन्हें ज्यादा ब्याज दिया गया। 

वित्त राज्य मंत्री ने आगे कहा कि 2020 रिफार्म ईयर के रूप में याद किया जाएगा जिसमें एसेंशियल कमोडिटी एक्ट और MSME जैसे एक्ट में बदलाव किया गया। 

जब उनसे पूछा गया कि क्या कोरोना के समय, केंद्र सरकार अपनी खरीदने की शक्ति को सीमित कर रही है, तो अनुराग ने बताया कि जितना रिज़र्व आरबीआई के पास है, उससे आराम से भारत इस हालत से बाहर निकल सकता है। उनके मुताबिक, 

• राज्य सरकारों के माध्यम से, देश के करोड़ों गरीब परिवारों को 3 महीने का अनाज दिया गया 

• 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों को 3500 करोड़ का अनाज दिया गया 

• प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार उनका 85% रेलवे का खर्चा वहन कर रही है 

• केंद्र को टैक्स में हिस्सा देने के लिए, केंद्र राज्य सरकारों को दो महीने के लिए 92,077 करोड़ रूपये दे चुकी है 

• 11000 करोड़ स्टेट डिजास्ट्रस रिस्पांस फण्ड में दे चुकी है 

अनुराग ने आगे बताया कि कांग्रेस ने भले ही MGNREGA की शुरूआत की हो लेकिन उन्होंने हमेशा बजट से कम ही खर्च किया था, जबकि केंद्र सरकार ने एक लाख करोड़ का बजट रखकर एक एतिहासिक फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने ये फैसला मुसीबत के समय फंसे गरीबो की मदद करने के लिए लिया है। 

उन्होंने बताया कि जितने भी मजदूर अबतक घर पहुंचे हैं, उनका 85% खर्चा केंद्र सरकार ने ही दिया है और साथ ही उन्हें मुफ्त में खाने और पीने का समान भी मुहैया कराया है। वित्त राज्य मंत्री कहा कि विपक्ष हमेशा से ही जनता को गुमराह करती है और देश के आगे गलत आकड़े पेश करती है। 

जब उनसे पूछा गया कि क्या केंद्र सरकार रेलवे और एयरवेज का निजीकरण करने की योजना बना रही है तो अनुराग ने बताया कि ज्यादा से ज्यादा 4 सार्वजनिक उपक्रम (Strategic Public Sector Enterprises)  को छोड़कर बाकि का निजीकरण कर दिया जाएगा। उन्होंने आगे आत्मनिर्भर भारत पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि हमे कोयला का आयत कम करना होगा। उन्होंने कहा कि अगर हम चीजों का आयत कम कर देंगे तो इससे देश में ज्यादा नौकरियां पैदा होंगी जिसके कारण देश आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने डिफेन्स की बात करते हुए कहा कि ज्यादातर हथियार भारत में ही बनने चाहिए। उन्होंने निवेश के ऊपर बात करते हुए कहा कि रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में ऑटोमैटिक मार्ग से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को 49 से बढ़ाकर 74 प्रतिशत किया गया है।