Economic Affairs Secretary Subhash Chandra Garg (File | PTI)
Economic Affairs Secretary Subhash Chandra Garg (File | PTI)

Economy

चालू वित्त वर्ष में हासिल हो सकता है 3.3 प्रतिशत राजकोषीय घाटे का लक्ष्य: व्यय सचिव

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने शनिवार को विश्वास व्यक्त किया कि 2018- 19 की समाप्ति 3.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के साथ हो सकती है। यह आंकड़ा बजट में राजकोषीय घाटा 3.4 प्रतिशत रहने के संशोधित अनुमान से कम है। इससे पहले बजट अनुमान में इसके 3.3 प्रतिशत ही रहने का अनुमान रखा गया था।

उन्होंने कहा कि सरकार ने 2020- 21 तक राजकोषीय घाटे को तीन प्रतिशत और प्राथमिक घाटे को पूरी तरह समापत करने के तय लक्ष्य को बरकरार रखा है।

गर्ग ने पीटीआई- भाषा से बजट बाद साक्षात्कार में कहा, ‘‘पिछले दो साल के दौरान तय रास्ते से विचलन बहुत मामूली रहा है। दूसरे यह तय रास्ते के रूझानों से आगे नहीं गये हैं ... इस साल इसे 3.3 प्रतिशत रहना चाहिये था, यह 3.4 प्रतिशत रहा जो कि 3.5 प्रतिशत से कम है। हम वित्त वर्ष की समाप्ति 3.3 प्रतिशत राजकोषीय घाटे के साथ कर सकते हैं और अपने बजट अनुमान पर टिके रह सकते हैं।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह यह रास्ता 2020- 21 तक तीन प्रतिशत राजकोषीय घाटे की तरफ जाता है। इसमें मात्र 0.3 अथवा 0.4 प्रतिशत के समायोजन की आवश्यकता है। मेरा मानना है कि हम इसे 2020-21 में निश्चित तौर पर कर सकते हैं। मेरा मानना है कि हमें इसे (वित्तीय जवाबदेही और बजट प्रबंधन अधिनियम) संशोधित करने की आवश्यकता नहीं है।’’ 

संसद में शुक्रवार को पेश अंतरिम बजट में 2019- 20 के लिये राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। इसके साथ ही सरकार ने आने वाले वर्षों में राजकोषीय घाटे को कम करने की योजना का भी खुलासा किया है। इसमें कहा गया है कि 2020- 21 तक राजकोषीय घाटे को जीडीपी का तीन प्रतिशत और प्राथमिक घाटे को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा तय की गई है। 

सरकार के कुल व्यय और उसकी सकल राजस्व प्राप्तियों, रिणों की वसूली और अन्य प्राप्तियों के बीच के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। 2019- 20 में इसके 7,03,999 करोड़ रुपये रहने का बजट अनुमान है। इसी प्रकार राजकोषीय घाटे में से सरकारी कर्ज पर कुल ब्याज भुगतान के अंतर को प्राथमिक घाटा कहते हैं। अगले वित्त वर्ष में प्राथमिक घाटा सकल घरेलू उत्पाद के समक्ष 0.2 प्रतिशत रहने का बजट अनुमान है। 

दस्तावेजों में 2020- 21 और 2021- 22 में प्राथमिक घाटा शून्य रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। दस्तावेज में कहा गया है कि प्राथमिक घाटे में कमी आना सकारात्मक संकेत हैं। इससे पता चलता है कि उधार लिये गये धन का मौजूदा देनदारियों को चुकाने के लिये इस्तेमाल कम हो रहा है। 

बजट दस्तावेजों में 2018- 19 के दौरान सकल कर राजस्व में अनुमान से कुछ कम प्राप्ति दिखाई देती है। यह मुख्यतौर पर जीएसटी खाते में अनुमान से कम प्राप्ति होने की वजह से रही है। सरकार ने कहा है कि 2019- 20 में सकल कर राजस्व जीडीपी के मुकाबले 12.1 प्रतिशत बढ़ेगा और इसके 12.2 प्रतिशत तक पहुंचने से पहले यह 2020- 21 तक इसी स्तर पर स्थिर रहेगा।


 

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