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Movie Reviews

'पकड़वा शादी' की जबर और मजेदार कहानी है जबरिया जोड़ी - राइटर संजीव कुमार झा

Written By Amit Bajpayee | Mumbai | Published:

देश में ऐसा कोई मुद्दा नहीं जिसे फिल्मेकर ने अपनी कहानियों में ना भुनाया हो. बॉलीवुड की नई फिल्म 'जबरिया जोड़ी' हमारे समाज के और मसले की मजेदार कहानी ले कर आ रही है. इस फिल्म की कहानी दुल्हा किडनैपिंग की बेस्ट स्टोरी बताई जा रही है. इस फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा पटना के दबंग अभय सिंह के रोल में है वहीं परिणीति चोपड़ा लिट्रेचर में एमए करने वाली स्टूडेंट बनी हैं. 

अपनी बचपन से जुड़े घटनाओं से प्रेरित होकर इस फिल्म की पटकथा लिखने वाले राइटर संजीव कुमार झा ने रिपब्लिक भारत से एक्सलुसिव बातचीत की .

संजीव कुमार झा ने कहा, मैं मूल रुप से बिहार का रहने वाला हूं. अक्सर मेरे आस पास 'जबरन शादी' करवाई गई. ऐसी ही एक घटना मेरे कॉलेज के दिनों ( 2004-2005) में मेरे आंखों के सामने घटित हुई. जो हमारे समाज का एक दुखद और मजाकिया पहलू भी है. इसी विषय को लेकर मैंने 'जबरा जोड़ी' को फिल्म पर्दे पर उतारने का फैसला किया है.

 झा ने आगे कहा ,  बचपन के दिनों से ही साहित्यिक माहौल पला-बढ़ा हूं. मेरे नाना रमेश चंद्र झा एक कवि, उपन्यासकार और स्वतंत्रता सेनानी थे. ऐसे में उनसे मिलने अक्सर घर पर हरिवंश राय बच्चन और शिवपूजन सहाय ​​​​​​आया करते थे. वह कई बार परिवार के सामने मंच से जुड़ी रोचक घटनाओं के जिक्र किया करते थे. उनकी कविताएं लोगों के जीवन संघर्ष, उनके सपनों और आशाओं की चिंतआओं को व्यक्त करती है. इस परिवेश में मुझे समाज से जुड़े मुद्दों को लिखने की कला मिली. 

अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए लेखक संजीव कहते है कि यह लालू यादव का दौर था. इस दौरान चारा घोटाला में फंसने के बाद लालू ने अपनी गृहिणी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार की सत्ता सौंप दी थी. 1990 से लेकर 2005 तक लालू यादव का परिवार बिहार की सत्ता में क़ाबिज़ रहा. 

यह वह दौर था जब मेरे दोस्त जेब में कट्टा रखकर स्कूल आते थे. मैं देखता था कि मेरे आस पास के लोग फिरौती मांग रहे हैं. मेरी दोस्ती ऐसे लोगों से हो रही है जो क्रिमनल माइंडे वाली प्रवृत्ति रखते हैं और उस वक्त तो जबरन शादी की घटनाएं तो आम थी. 2005 के विधानसभा चुनाव के बाद सूबे में हुए सत्ता परिवर्तन से बिहार में बदलाव आया. 

इसी क्रम में अपनी आगे के पढ़ाई के लिए संजीव मोतीहारी से मुजफ्फरपुर, फिर दिल्ली तक का सफर तय किया. दिल्ली पहुंच कर संजीव कुमार झा ने जामिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया. यहां से उनकी कलम को और धार मिली. 


दर्शकों पर प्रभाव 

संजीव कुमार झा ने कहा इन दिनों बॉलीवुड फिल्मों की कहानियां लखनऊ , रांची , पटना के बैकड्रॉप पर सेट की जाने लगी हैं. दर्शकों को स्माल टाउन करेकटर पसंद आने लगा है. इन जगहों से जुड़ी कई दिलचस्प कहानियां अब लोगों के सामने आने लगी है. यह फिल्म भी समाज से जुड़े मुद्दे को उठाता है, जिसकी वजह से आम दर्शक फ़िल्म से जुड़ाव महसूस करें. साथ ही फिल्म की कहानी रोमांचक और पूरी तरह मनोरंजक है. इस फिल्म में ऐक्शन, ड्रामा, रोमांस और थ्रिल का भरपूर ओवरडोज  है, जिससे चलते दर्शकों को पसंद भी आएगी.

 

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