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‘जबरिया जोड़ी’ हास्य अंदाज में पेश की गई एक कहानी है : परिणीति

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:


 फिल्म अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा और अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा का कहना है कि उनकी आगामी फिल्म ‘‘जबरिया जोड़ी’’ में दूल्हे के अपहरण की कहानी को प्रस्तुत किया गया है, लेकिन फिल्म कोई ‘‘गंभीर उपदेश’’ नहीं देती।

सिद्धार्थ ने कहा कि फिल्म बिहार में प्रचलित एक प्रथा के हास्य कोण को दिखाती है।

उन्होंने यहां संवाददाताओं को बताया, ‘‘यह एक रोचक कहानी है, जिसे हमने एक हास्यपूर्ण मोड़ दिया है। हास्य अंदाज में दहेज पर एक संदेश भी है। यह एक ऐसी प्रेम कहानी है जो परिणीति और मैं दोनों ने पहले नहीं की है।’’ 

परिणीति ने कहा कि फिल्म का उद्देश्य सामाजिक संदेश देना नहीं है और इसलिए इसे हास्यपूर्ण ढंग से पेश किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम इस फिल्म के माध्यम से कोई गंभीर उपदेश या संदेश नहीं दे रहे हैं। हम आपको केवल यह दिखा रहे हैं कि भारत में ऐसा भी होता है। चूंकि हम हास्य पसंद करते हैं, इसलिए हमने इसे एक कॉमिक टच दिया है।’’ 

प्रशांत सिंह के निर्देशन में बनी यह फिल्म सिनेमाघरों में दो अगस्त को रिलीज होने जा रही है।


इससे पहले अपनी बचपन से जुड़े घटनाओं से प्रेरित होकर इस फिल्म की पटकथा लिखने वाले राइटर संजीव कुमार झा ने रिपब्लिक भारत से एक्सलुसिव बातचीत की।

संजीव कुमार झा ने कहा, मैं मूल रुप से बिहार का रहने वाला हूं. अक्सर मेरे आस पास 'जबरन शादी' करवाई गई। ऐसी ही एक घटना मेरे कॉलेज के दिनों ( 2004-2005) में मेरे आंखों के सामने घटित हुई। जो हमारे समाज का एक दुखद और मजाकिया पहलू भी है। इसी विषय को लेकर मैंने 'जबरा जोड़ी' को फिल्म पर्दे पर उतारने का फैसला किया है।

झा ने आगे कहा ,  बचपन के दिनों से ही साहित्यिक माहौल पला-बढ़ा हूं। मेरे नाना रमेश चंद्र झा एक कवि, उपन्यासकार और स्वतंत्रता सेनानी थे. ऐसे में उनसे मिलने अक्सर घर पर हरिवंश राय बच्चन और शिवपूजन सहाय ​​​​​​आया करते थे। वह कई बार परिवार के सामने मंच से जुड़ी रोचक घटनाओं के जिक्र किया करते थे। उनकी कविताएं लोगों के जीवन संघर्ष, उनके सपनों और आशाओं की चिंतआओं को व्यक्त करती है. इस परिवेश में मुझे समाज से जुड़े मुद्दों को लिखने की कला मिली। 

अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए लेखक संजीव कहते है कि यह लालू यादव का दौर था? इस दौरान चारा घोटाला में फंसने के बाद लालू ने अपनी गृहिणी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार की सत्ता सौंप दी थी। 1990 से लेकर 2005 तक लालू यादव का परिवार बिहार की सत्ता में क़ाबिज़ रहा।

यह वह दौर था जब मेरे दोस्त जेब में कट्टा रखकर स्कूल आते थे। मैं देखता था कि मेरे आस पास के लोग फिरौती मांग रहे हैं। मेरी दोस्ती ऐसे लोगों से हो रही है जो क्रिमनल माइंडे वाली प्रवृत्ति रखते हैं और उस वक्त तो जबरन शादी की घटनाएं तो आम थी. 2005 के विधानसभा चुनाव के बाद सूबे में हुए सत्ता परिवर्तन से बिहार में बदलाव आया।

इसी क्रम में अपनी आगे के पढ़ाई के लिए संजीव मोतीहारी से मुजफ्फरपुर, फिर दिल्ली तक का सफर तय किया. दिल्ली पहुंच कर संजीव कुमार झा ने जामिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया। यहां से उनकी कलम को और धार मिली।

 

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